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भारत मे स्थलीय सीमा की चुनौतियां

Posted on : 24-August-2021 17:08:31 Writer : डॉ ईश्वर चन्द्र शर्मा


भारत मे स्थलीय सीमा की चुनौतियां


विशाल भू भाग वाले देश भारत की थल सीमा (लैंड बार्डर) की कुल लम्बांई 15106.7 किलोमीटर है। यह सीमा कुल सात देशो से लगती है। जिन सात देशो से भारत की स्थल सीमा सटी हुई वै है- बांग्लादेश (4096.7 किमी), चीन (3488 किमी), पाकिस्तान (3323 किमी), नेपाल (1751किमी), म्यांमार (1643 किमी), भुटान (699 किमी) और अफगानिस्तान(106 किमी)।

भारत की अन्तर्राष्टीय स्थलीय सीमा विविधताओं से भरी हुई है। कहीं रेगिस्तान कि रेतीली सीमा है तो कहीं पठारी सीमा का भू भाग और कहीं घने वनों से आच्छादित पर्वतीय सीमा है तो कहीं ऊंचीं-ऊंचीं बर्फीली चोटियों से घिरी सीमांए है।

भारत की इन विविधताओं से भरी अन्तर्राष्टीय स्थलीय सीमा पर अनेक चुनौतियां दिखाई देती है। ये वे चुनौतियां हैं, जिनका सामना सेनाए सीमावर्ती क्षेत्र के नागरिको और देश कि सम्पूर्ण सुरक्षा प्रणाली को करना पड़ता है। इस लेख में हम भारत की चुनौतियो को समझने का प्रयास करेंगे।

भारत की स्थलीय सीमा से सम्बन्धित प्रमुख चुनौतियां तस्करीए हनीट्रे, घूसपेठ, पडौसी देशो द्वारा सीमा पर बस्तियां बसाना व पक्के निर्माण करना, साम्प्रदायिकता, आतंकवाद, सीमा विवाद और सीज फायर का उल्लंघन किया जाना आदि है।

भौगौलिक चुनौतियां-

समाप्त नही। विषम भौगौलिक परिस्थितियों का सामना करने के लिए सैनिको को विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है। हाल ही मे चीन के साथ हुए सीमा विवाद ने विषम , नदियो का प्रवाह और गर्म रेत व हवा स्थलीय सीमा पर भौगौलिक चुनौतियों के रूप मे नजर आते है। हालांकि इन चुनौतियां का मुकाबला करने के लिए सरकार द्वारा साधन उपलब्ध करवाए जाते है फिर भी ये साधन चुनौतियां को कम कर सकते है, घाटियां, हिमस्खलन व आक्सीजन कि कमी का भी सामना करना पडता है। संकरे रास्ते, बर्फबारी, ह् तापमान मे लु के थपेडो और रेतीली आंधियो के प्रहार स्थलीय सीमा पर सैनिकों की क्षमता को चुनौती देते नजर आते है। हिमालयी क्षेत्रों में जवानों को अत्यधिक ठण्ड50डिग्री सेंटीग्रेड में भारतीय सैनिक मुस्तैदी से डटे रहते हैए वहीं गर्मियो मे रेगिस्तानी सरहद पर 30 से -10 डिग्री और चीन की सीमा पर कई इलाको में -50 जहां सियाचिन में   -, बर्फीली घाटियों और चोटियों पर सीमा की सुरक्षा एक महत्वपुर्ण चुनौती है भौगोलिक परिस्थियों में भी कड़ी सैन्य निगरानी को अनिवार्य बना दिया है। ‘‘मिलम, दारमा और व्यास घाटी मे 5 से 6 फिट बर्फ के बीच भारतीय सेना और अर्द्धसैनिक बलो के जवाान हर रोज चीन सीमा पर गश्त कर रहे है।

सीमा विवाद-


भारत का चीन, पाकिस्तान और नेपाल के साथ सीमा विवाद भी स्थलीय सीमा पर चुनौती बना हुआ है। भारत और चीन के बीच मेकमोहन रेखा को भारत सीमा मानता है, किन्तु चीन इसे स्वीकार नही करता। इस कारण दोनो के बीच समय-समय पर सीमा को लेकर टकराव होता रहता है। पिछले दिनो लद्दाख के गलवान घाटी मे भारत और चीन मे बीच उत्पन्न सैन्य तनाव के मूल मे भी दोनो देशो के बीच सीमा विवाद रहा है। न केवल लद्दाख अपितु अरूणाचल प्रदेश और अन्य क्षैत्रो भी दोनों देशो के बीच विवाद चुनोंती के रूप मे प्रकट होता है।

भारत और नेपाल के बीच कालापानी, लिंपियाधुरा व लिपुलेख को लेकर टकराव है। भारत की ओर से नेपाल सीमा के पास सडक निर्माण के काम की वजह से दोनो देशों के बीच तनाव बढा है। नेपाल ने इन तीनो इलाको को अपने हिस्से मे दिखाते हुए देश का नया नक्शा प्रकाशित किया गया। इस नक्शे को नेपाली संसद ने मंजूरी दे दी है।2


भारत पाकिस्तान कि स्थलीय सीमा पर भी विवाद है। कश्मीर का एक बडा भू भाग च्व्ज्ञ के रूप में पाकिस्तान के कब्जे में है। कश्मीर के अलावा सियाचिन विवाद भी भारत-पाकिस्तान के बीच में सीमा विवाद है। ‘‘साल 1972 के शिमला समझौते ये नही बताया गया कि भारत और पाकिस्तान की सीमा सियाचिन में कहां होगी। उसके बाद से इस क्षेत्र पर पाकिस्तान ने अपना अधिकार जताना शुरू कर दिया। 1984 में पाकिस्तान सियाचिन पर कब्जें की तैयारी में था। लेकिन सही समय पर इसकी जानकारी होने के बाद सेना ने ऑपरेशन मेघदूत लॉन्च किया। 13 अप्रैल 1984 को सियाचिन ग्लेशियर पर भारत ने कब्जा कर लिया।3


 भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा से सम्बन्धित सर क्रीक विवाद भी महत्वपूर्ण है। ‘‘सर क्रीक 60 किलोमीटर लम्बी दलदली जमीन का विवाद है जो भारतीय राज्य गुजरात और पाकिस्तान के राज्य सिन्ध के बीच स्थित है। सर क्रीक पानी के कटाव के कारण बना है और यहंा ज्वार-भाटे के कारण यह तय नही होता कि कितने हिस्से में पानी रहेगां और कितने में नही।‘‘4


आजादी के बाद जब दोनों देशों के बीच बंटवारा हुआ तो पाकिस्तान ने सर क्रीक खाड़ी पर अपना मालीकाना हक जता दिया। इस पर भारत ने एक प्रस्ताव तैयार किया जिसमें समुद्र में कच्छ के एक सिरे से दूसरे सिरे तक सीधी रेखा खींची और कहा की उसे ही सीमा रेखा मान लेनी चाहिए, यह प्रस्ताव पाकिस्तान ने ठुकरा दिया, क्योंकि इसमे 90 फीसदी हिस्सा भारत को मिल रहा था।

इस प्रकार भारत की स्थलीय सीमा पर पडौसी देशों के साथ सीमा विवाद की चुनौती भी मुँह बाए खडी है।

पड़ौसी देशों द्वारा सीमा पर बस्तियां बसाना और पक्के निर्माण करना:-

भारतीय स्थलीय सीमा पर पडौसी देशों द्वारा पक्के निर्माण और बस्तियों को बसाकर भी एक चुनौती दी जा रही है। विशेषकर चीन के द्वारा ‘‘डोकलाम विवाद‘‘ में कामयाब न हो पाने के बाद इस प्रकार का कार्य वृहत् स्तर पर किया जा रहा है।


‘‘चीन ने वर्ष 2017 में तिब्बत सीमा पर 600 अत्याधुनिक बाँर्डर डिफेन्स विलेज बसाना शुरू किया है। इन गांवो को अरूणाचल प्रदेश की सीमा पर स्थित अपने नागरीऔर शिगत्सेइलाको में बनाना  शुरू किया है। ये सभी गांव उन रास्तों पर बनाए गए हैं जिनका उपयोग कभी तिब्बती लोग छिपकर भारत और नेपाल भागने के लिए किया करते थे। इन गांवों में चीन की सत्तारूढ़ कम्यूनिस्ट पार्टी के कार्यकर्त्ताओं को बसाया जा रहा है। तिब्बती संगठनो का कहना हैं इन गांवो को बसाने का उद्देश्य तिब्बत और बाकि दुनिया के बीच अभेद्य सुरक्षा बैरियर बनाना है। इसके जरिए चीन की कोशिश दलाईलामा के समर्थकों की तिब्बत मे घुसपैठ को रोकनाए तिब्बतियों पर नज़र रखना और कम्युनिस्ट पार्टी के हितों को साधना है। चीन ने तिब्बत की राजधानी ल्हसा को चीन के सिचुआन से जोड़ने के लिए रेलवे टनल ब्रिज बनाया हैं। इस पुल का रणनीतिक रूप से भारत की सीमा तक रेलवे को लाने में बहुत महत्वपूर्ण योगदान है।‘‘5 यह निर्माण भी भारत के लिए एक चुनौती है।

सीज फायंर का उल्लंघन:-

भारत और पड़ौसी देशांे के बीच सीज फायर समझौते के कारण शान्ति बनी रहती हैं। किन्तु पाकिस्तान द्वारा सीज फायर समझौते के उल्लंघन के कारण इस शान्ति को खतरा उत्पन्न हो जाता है। LOC पर हलचल के लिहाज से देखा जाए तो साल 2020 में पाकिस्तान ने 5133 बार सीज फायर को उल्लंघन किया।‘‘6 सीज फायर का उल्लंघन जहां सैनाओ के बीच तनाव पैदा करता है, वहीं सीमावर्ती क्षेत्र की जनता को भी  असुरक्षा के भाव से ग्रसित करता है।


घूसपेठ एवं जासूसी:-


भारतीय स्थलीय सीमा में पडौंसी देशों से अवैध घूसपैठ भी एक बहुत बडी चुनौती है। बांग्लादेश सीमा पर रोहिंग्याओ की घूसपैठ हो या पाकिस्तान सीमा पर आतंकवादियों की घूसपैठ या चीन सीमा पर चीनी सैनिको की घूसपैठ, सभी तरह की घूसपेठ भारतीय शान्ति और सुरक्षा को चुनौती देती दिखाई देती है। घूसपैठ के साथ-साथ सीमा पर जासूसी की घटनाएं भी एक चुनौती है।

जासूसी अब इंसानो के साथ-साथ पक्षियों से भी हो रही हैं। ‘‘राजस्थान की जैसलमेर सीमा के तनोट क्षेत्र में बबलियान सीमा चौकी से भारतीय सुरक्षा बलों नें पाकिस्तान की ओर से आए एक ट्रेंड कबूतर को पकड़ा है। इस कबुतर पर कुछ कोड लिखे हुए है। बबलियान वाला सीमा चौकी पर स्थित ओ पी टावर पर लाईट मशीन लगी हुई है। पकड़ा गया ट्रेंड कबूतर इस मशीन पर काफी देर बैठा रहा। पाकिस्तान जासूसी के लिए इस तरह की चाल चलता रहता है। इससे पूर्व शाहगढ बल्ज क्षेत्र में भी ऐसा ही कबूतर पकड़ा जा चुका है। लगातार हो रही घटनाओं के बाद से सुरक्षा एजेन्सियां काफी सतर्क है। ‘‘7

साम्प्रदायिकता एवं आतंकवादी घटनाएँ:-

देश विरोधी तत्वों द्वारा सीमावर्ती क्षेत्रों में फैलाऐ जा रहे साम्प्रदायिकता के जहर ने एक महत्वपूर्ण चुनौती का रूप ले लिया है। साम्प्रदायिकता का यह जहर परस्पर एकता को तो तोड़ता ही है, आतंकवाद को भी जन्म देता है और एक बडे वर्ग को देश की मुख्यधारा से काटकर देश के दुश्मनो के नापाक इरादो को पूरा करने में सहयोग करता है।


सीमा पर तस्करी:-


सीमा पर होने वाली तस्करी भी स्थलीय सीमा के लिए एक चुनौती है। भारत ड्रग्स के गोल्डन क्रेसेंट ;अफ़ग़ानिस्तान , पाकिस्तानए ईरान और गोल्डन ट्रायंगल ;म्यांमार, लाओसए थाईलैंड के मध्य स्थित है। अतः भारत में ड्रग्स का खतरा निरंतर बढ़ रहा है। भारत में वर्ष 2017 में 3 लाख  60 हज़ार किलो से अधिक ड्रग्स जब्त की गयी। हाल ही में राजस्थान सीमा पर सीमा सुरक्षा बल ने ऐसी ही एक गतिविधि को असफल किया है। ‘‘बीकानेर से लगती भारत-पाकिस्तान अन्तर्राष्ट्रीय सीमा पर स्थित सीमा चौकी बंधली पर तैनात सीमा सुरक्षा बल के प्रहरियों ने 2 जून 2021 को मादक पदार्थ तस्करी के प्रयास को विफल कर दिया। सीमा चौकी बंधली पर तैनात जवानों को तारबंदी के नजदीक कुछ हलचल दिखाई दी। जैसे ही सीमा प्रहरियों ने ललकारा और गोली चलाई तो वहां मौजूद तस्कर अंधेरे और खराब मौसम का फायदा उठाते हुए भाग खडे हुए। घटनास्थल की तलाशी में 56 किलो 630 ग्राम मादक पदार्थ ( संभवतः हेरोईन) बरामद किया गया। बी एस एफ के अनुसार, यह राजस्थान फ्रंटियर के जिम्मेवारी वाले इलाके में मादक पदार्थों की अब तक की सबसे बड़ी बरामदगी हैं। ‘‘8

हनीट्रेप की घटनाएँ:-


सीमावर्ती क्षेत्रो में नागरिकों को और सैनिकों को हनीट्रेप में फंसाकर देश की संवेदनशील जानकारियों को हासिल करने में लगें पड़ौसी देशों द्वारा देश की सुरक्षा को चुनौती दी जा रही है। पाकिस्तान की स्लीपर सेल भारत की सीमावर्ती भागो में सक्रिय है। इसके माध्यम से प्रभावशाली लोगों की जानकारी पाकिस्तान भेजी जाती है। उसके बाद प्रभावशाली लोगों को हनी ट्रैप में फ़साने के प्रयत्न आरम्भ हो जाते है। महिला एजेंट फ़ोन और अन्य माध्यमों से लोगों को अपने जाल में फ़साने शुरू कर देती है। एक बार फसने के बाद वे सेना सम्बन्धित और अन्य रणनीतिक जानकारी पाकिस्तान को देना शुरू कर देते है। ‘‘जैसलमेर के चांधन गांव से खुफिया एजेंसियों ने पाकिस्तान के लिए जासूसी करने वाले एक युवक को डिटेन किया था। पूर्व में कुछ लोग और सेना के जवान इस तरह हनी ट्रेप का शिकार हो चुके है। गत वर्ष लाठी क्षेत्र के एक प्रभावशाली व्यक्ति को इसी तरह पकडा गया था। इसी तर्ज पर गत कुछ बरसों में इस क्षेत्र से लगातार लोग पकडे गए है।‘‘9

इस प्रकार कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि विभिन्नताओं से भरी भारतीय स्थलीय सीमा विविध चुनौतीयों का सामना कर रही है। सेना के हौसलो, सरकार के दृढ़ संकल्पों एवं देश के नागरिकों की देश भक्ति से इन चुनौतियों का शक्ति के साथ मुकाबला किया जा रहा है। भारत सदैव सुरक्षित रहेगा, हमारी अखण्ड़ता अक्षुण्ण रहेगी और सीमाएँ चुनौतियों का सामना कर पाऐंगी ऐसी हम आशा करते है।