बाढ़ से केरल की स्थिति अत्यंत गंभीर

इन जिलों में चेतावनी

केरल में बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति बहुत ही गंभीर है। यह वो क्षेत्र है जहाँ से पंपा एवं मणिमाला नदियाँ निकलती है। पिछले कई दिनों से हो रही वर्षा से नदियों में बह रहे पानी का लेवल इतना बढ़ गया है कि दोनो नदियाँ मिल गई हैं। जिससे कि नदी की चौड़ाई अब 7 किलोमीटर से 10 किलोमीटर तक की हो गई है। बढ़ में फँसे हुए लोगों ने वर्षा के इतने गंभीर परिणाम की कल्पना तक नहीं की थी। वे थोड़ा थोड़ा कर के ऊपर जाते रहे और अंततः ऊपर ही फँसे रह गए। पानी 12 से 15 फीट की उँचाई पर बह रहा है। जिससे की मकानों की दूसरी मंजिल भी बाढ़ के चपेट में आ गई है। जैसा कि जानने में आया है – इस प्रकार की बाढ़ केरल के इतिहास में कभी नहीं आई है।

इस पेज के माध्यम से हम केरल की स्थिति की नवीनतम जानकारी शेयर करते रहेंगे।  

विशेषज्ञों की मानें तो नौसेना, कोस्ट गार्ड या एन॰डी॰आर॰एफ॰ ही इस रेस्क्यू ऑपरेशन को सही तरीके से क्रियान्वित कर सकते हैं। ये राज्य सरकार की या किसी अन्य सिविल संस्था की क्षमता के परे है। रोजाना एरियल सर्वे करने की बहुत अधिक आवश्यकता है। एरियल सर्वे से दो बातों का पता चलता है – एक ये कि कितना क्षेत्र बाढ़ के प्रभाव में है, दूसरा इस बात का अनुमान लगाना कि समस्या कितने दिन तक बनी रहने वाली है।

राहत कार्य में ये भी अहम है कि सुरक्षित स्थानों का पता लगाया जाए जहाँ पर बचाए गए नागरिकों को लाकर उपचार प्रारंभ हो सके। अब स्थिति ऐसी है के केवल एक ही रास्ता बचा है। और वो है – एयर लिफ्ट का। 

भारी वर्षा के कारण वायुयान की यात्रा भी कई स्थानों पर ठप हो गई है। जैसा कि एर्नाकुलम में। अब विमानों को त्रिवेंद्रम की ओर भेजा जा रहा है। 

सेना की टुकड़ियाँ हर समय ऐसी परिस्थिति के लिए तैयार रहती हैं। पिछले दिनो दिल्ली में यमुना का लेवल बढ़ने से खतरा बढ़ गया था। इसके लिए तीन सेना की बटालियन दिल्ली के हवाई अड्डे पर तैयार खड़ी थी।विषम परिस्थियों के लिए सदा तैयार। प्रत्येक बटालियन में 150 फौजी।

रक्षा मंत्रालय लगातार राज्य सरकार से समन्वय बनाए हुए है। और आवश्यकतानुसार संसाधनो की आपूर्ती कर रही है। सेना के माध्यम से ये कार्य किया जा रहा है।

रक्षा मंत्रालय द्वारा सेना के माध्यम से भेजे गए संसाधन

इस राहत कार्य में सभी की महत्वपूर्ण भूमिका बताई जा रही है – एन॰डी॰आर॰एफ॰, नौसेना, वायुसेना एवं थल सेना। सभी अपने अपने कौशल के अनुरूप काम कर रहे हैं।

वायु सेना द्वारा किया जा रहा राहत कार्य

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