लेह-लद्दाख – सीमा दर्शन कार्यक्रम

अत्यंत प्रसन्नता का विषय है कि कल दिल्ली से लेह-लद्दाख की सीमा दर्शन का कार्यक्रम समपन्न हुआ। जिसमें दिल्ली सीमा जागरण मंच के 24 कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। सभी कार्यकर्ताओं ने कुशक बकुला रिंपोचे जन्म-शताब्दी पर आयोजित दो-दिवसीय सेमिनार तथा जोजिला सुरंग शिलान्यास कार्यक्रम मे भाग लिया।

जोजिला सुरंग

जम्मू-कश्मीर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एशिया की सबसे बड़ी सुरंग का शिलान्यास किया। पीएम ने श्रीनगर-करगिल और लेह के बीच सभी मौसमों में संपर्क मुहैया कराने वाली जोजिला सुरंग की आधारशिला रखी। ये सुरंग करीब ₹6,800 करोड़ की लागत से बनेगी, जो एशिया की सबसे लंबी दो तरफा यातायात सुविधा वाली सुरंग होगी। सुरंग से 3.5 घंटे का समय महज 15 मिनट हो जाएगा।

कुशक बकुला रिंपोचे जन्म-शताब्दी समारोह

कुशक बकुला महात्मा बुद्ध के उस संकल्प, परम्परा के 19वें वाहक हैं, जिसमें बुद्ध ने कहा था — जब तक प्राणीमात्र कष्ट में है, तब तक मैं निर्वाण प्राप्त नहीं करूँगा। सर्वसमावेशी व्यक्तित्व के धनी कुशक बकुला संत, अध्यापक, देशभक्त, लोकप्रिय जननेता, सच्चे बौद्ध थे। सन् 1988 में उन्हें भारत सरकार ने पद्मभूषण से सम्मानित किया था। सन् 1989 में मंगोलिया में भारत के राजदूत रहते हुए मंगोलिया में लोकतंत्र बहाली के लिये कुशक बकुला का विशेष योगदान रहा। उन्होंने सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच के टकराव को शांत करते हुए भारी रक्तपात होने से बचाया। 10 वर्षों तक वे मंगोलिया में राजदूत रहे और बौद्ध धर्म पुनरुथान के लिए कार्य किया। राजदूत पद छोड़ने के बाद मंगोलिया ने उन्हें वहां का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘पोलर स्टार’ प्रदान किया।

लेह में 16 मई को कुशक बकुला जन्म शताब्दी समारोह का समापन हुआ।

सीमा दर्शन कार्यक्रम से संबंधित कुछ चित्र

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