रिटायर होते ही डी॰जी॰पी॰ चले पढ़ाने, स्कूल में नहीं था कोई गणित का शिक्षक

गुवाहाटी। असम के पूर्व डीजीपी मुकेश सहाय आजकल चर्चा का केंद्र बने हुए हैं। यह चर्चा उनके एक अच्छे काम के लिए हो रही है। हाल ही में रिटायर हुए मुकेश सहाय अब स्कूल में शिक्षक बन गए हैं। वह एक ऐसे स्कूल में पढ़ा रहे हैं, जहां दो साल से गणित का कोई टीचर नहीं था।

गुवाहाटी के सरकार द्वारा संचालित सोनाराम हायर सेकंडरी स्कूल में बीते दो साल से कोई गणित का शिक्षक नहीं था। यहाँ के छात्रों को गणित पढ़ने के लिए प्राइवेट शिक्षकों का सहारा लेना पड़ता था। जो गरीब छात्र होते उन्हें सबसे ज्यादा परेशानी होती, लेकिन अब इन छात्रों की सारी परेशानी दूर हो रही है।

कभी यहाँ चीफ गेस्ट बनकर आए थे

मुकेश सहाय जब असम के डी॰जी॰पी॰ थे, तब वह सोनाराम स्कूल में मुख्य अतिथि बनकर गए थे। कार्यक्रम में सम्मानित होने के दौरान उन्हें पता चला कि स्कूल में दो साल से कोई भी गणित का शिक्षक नहीं है। छात्रों को बहुत परेशानी हो रही है।

डीजीपी रहते हुए बंधे थे हाथ

मुकेश सहाय ने बताया कि छात्रों की परेशानी पता चलने के बाद भी वह कुछ करने की स्थिति में नहीं थे। उनके पास पूरे प्रदेश की कानून-व्यवस्था का जिम्मा था, इसलिए वह खुद वहाँ समय नहीं दे सकते थे। उनके दिमाग में चिंता थी पर वह असहाय थे।

रिटायर होते ही बने शिक्षक

मुकेश सहाय ने बताया कि उनके दिमाग में यह बात घर कर गई थी। 30 अप्रैल को वह रिटायर हुए, उसी दिन घर आकर उन्होंने स्कूल के प्रिंसिपल से फोन पर बात की और पूछा कि उन्हें कोई गणित का शिक्षक मिला या नहीं।प्रिंसिपल ने उन्हें बताया कि अभी तक स्कूल में 12वीं कक्षा के बच्चों को पढ़ाने के लिए कोई शिक्षक नहीं मिला है। उन्होंने प्रिंसिपल से कहा कि कल से वह स्कूल में गणित पढ़ाने आएंगे।

एक से दो घंटे तक लगातार चलती है क्लास

मुकेश सहाय जब क्लास में पढ़ाने जाते हैं तो वह पढ़ाने में इतना खो जाते हैं कि उन्हें समय का ख्याल ही नहीं रहता है। सामान्यतया 40 मिनट का पीरियड एक घंटे से दो घंटे के बीच चलता है। इस बीच उनके छात्रों को भी समय का आभास नहीं होता है। उन्हें अपने नए गणित टीचर का पढ़ाने का तरीका इतना पसंद है कि वे क्लास में जरा भी नहीं ऊबते।

बिहार के रहने वाले हैं मुकेश

मुकेश सहाय ने बताया कि उनका जन्म बिहार के छपरा में हुआ था, लेकिन वह पटना में पले-बढ़े। उन्होंने गणित और सांख्यिकी के साथ भौतिकी से परास्नातक किया। 1984 में उनका चयन आई॰पी॰एस॰ में हो गया। 1990 में जब वह सीबीआई में थे, तब उन्होंने कानून की भी पढ़ाई की। उनकी पत्नी भी सामाजिक कार्यों में रुचि लेती हैं। उनके दो बेटे हैं जो बेंगलुरु और हैदराबाद में नौकरी करते हैं।

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One Comment on “रिटायर होते ही डी॰जी॰पी॰ चले पढ़ाने, स्कूल में नहीं था कोई गणित का शिक्षक”

  1. देश हित ने हमें अपना कोई ना कोई कंट्रीब्यूशन करते रहना चाहिए

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