भारत को मिली अंधेरे से आजादी, देश का हर गाँव हुआ रौशन

28 अप्रैल को शाम 5:30 बजे का समय भारतीय इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गया है। मणिपुर के लाइसंग गांव में जब बिजली पहुँची तो इसके साथ ही भारत सरकार ने इतिहास रच दिया। देश के प्रत्येक गाँव तक बिजली पहुँचाने का प्रधानमंत्री मोदी का सपना पूरा हो गया, वो भी तय समय से पहले। इस उपलब्धि का ऐलान करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने ट्वीट में कहा कि, ‘28 अप्रैल 2018 को भारत की विकास यात्रा में एक ऐतिहासिक दिन के रूप में याद किया जाएगा। कल हमने एक वादा पूरा किया, जिससे भारतीयों के जीवन में हमेशा के लिए बदलाव आएगा। मुझे इस बात की प्रसन्नता है कि अब भारत के हर गाँव में बिजली सुलभ होगी।’

1000 दिन का लक्ष्य 987 दिन में पूरा

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 15 अगस्त 2015 को लालकिले से एक हजार दिन के भीतर देश के सभी गाँवों को रौशन करने के लक्ष्य की घोषणा की थी। उस समय देश के कुल 18,452 गाँवों में बिजली नहीं पहुँची थी। ये ऐसे गांव थे, जहाँ आजादी के करीब 70 साल बाद भी बिजली नहीं पहुँची थी। इसके लिए दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना शुरू की गई, जिसके तहत 987 दिन में ही लक्षय को पूरा कर लिया गया। देश के हर गाँव में बिजली पहुँचाने की दिशा में क्रांतिकारी बदलाव लाने वाली दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना के तहत 75,893 करोड़ के बजट का आवंटन किया गया था। अब बिजली से रौशन होने वाले कुल गाँवों की संख्या 597,464 हो गई है।

लाइसंग गाँव में रहते हैं सिर्फ 65 लोग

नेशनल पॉवर ग्रिड से जुड़ने वाला आखिरी गाँव लाइसंग मणिपुर के सेनापति जिले में है। सरदार हिल्स पर बसा हुआ यह एक छोटा सा गाँव है। इस गाँव की आबादी मात्र 65 हैं। लाइसंग में 19 परिवारों के कुल 65 लोग रहते हैं। इनमें 31 पुरुष और 34 महिलाएँ हैं। लाइसंग की तरह दूरदराज के कई गाँवों तक बिजली पहुंचाने में काफी मशक्‍कत करनी पड़ी। कई गाँवों में तो बिजली उपकरण सिर पर रखकर ले जाने पड़े।

अब देश का हर घर होगा रौशन

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 25 सितंबर, 2017 को प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना ‘सौभाग्य’ की शुरुआत की। इसके तहत मार्च 2019 तक सभी घरों को बिजली उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। इस योजना का फायदा उन लोगों को मिलेगा जो पैसों की कमी के चलते अभी तक बिजली कनेक्शन नहीं ले पाए हैं। इसके तहत गरीब परिवारों को बिजली कनेक्शन मुफ्त उपलब्ध कराया जाता है। इस योजना पर 16 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का खर्च आएगा। सरकार ने 2018-19 के बजट में 2750 करोड़ रुपए ‘सौभाग्य’ के लिए दिए हैं। यह उन चार करोड़ परिवारों के घर में नयी रोशनी लाने के लिए है जिनमें आजादी के 70 साल बाद भी अंधेरा है। यहाँ हम आपके सामने रख रहे हैं प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना ‘सौभाग्य’ से जुड़ी हर वो बात जो आपके लिए जानना जरूरी है।

इस नई योजना का उद्देश्य क्या है?

‘सौभाग्य’ का उद्देश्य अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी सुनिश्चत करते हुए सभी घरों में बिजली पहुँचाना और ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों के सभी शेष गैर विद्युतिकृत घरों में बिजली कनेक्शन सुलभ कराना है, ताकि देश में सभी घरों में बिजली पहुँचाने का लक्ष्य हासिल किया जा सके।

अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी और घरों में बिजली कनेक्शन मुहैया कराने में क्या-क्या शामिल हैं?

घरों में बिजली कनेक्शन देने के कार्य में संबंधित घर से निकटतम विद्युत खंबे से सर्विस केबल घर तक लाना, बिजली मीटर लगाना, एलईडी बल्ब और एक मोबाईल चार्जिंग प्वाइंट के साथ एकल विद्युत प्वाइंट के लिए तार डालना शामिल है। यदि सर्विस केबल लाने के लिए संबंधित घर के निकट विद्युत खंबा उपलब्ध नहीं है तो कंडेक्टर एवं संबंधित उपकरणों के साथ अतिरिक्त खंबा लगाया जाना भी इस योजना में शामिल है।

क्या हर गैर विद्युतीकृत घर को पूरी तरह से मुफ्त में बिजली कनेक्शन दिया जाएगा?

हाँ गरीब परिवारों को मुफ्त बिजली कनेक्शन दिए जाएँगे। इस योजना के तहत सिर्फ 500 रुपये के भुगतान पर अन्य घरों को भी विद्युत कनेक्शन मुहैया कराए जाएँगे। इस राशि की वसूली बिजली बिलों के साथ 10 किस्तों में डिस्कॉम/विद्युत विभागों द्वारा की जाएगी।

क्या मुफ्त बिजली कनेक्शन में उपभोग या खपत के लिए मुफ्त बिजली भी शामिल है?

इस योजना में किसी भी श्रेणी के उपभोक्ताओं को मुफ्त बिजली मुहैया कराने का कोई प्रावधान नहीं है। संबंधित उपभोक्ताओं को खपत की गई बिजली की कीमत का भुगतान डिस्कॉम/विद्युत विभाग की तात्कालिक शुल्क दरों के अनुसार करना होगा।

भारत सरकार के पूर्ववर्ती कार्यक्रम ‘सभी के लिए 24×7 बिजली’ का भी समान उद्देश्य है। अतः यह इस कार्यक्रम से किस तरह भिन्न है? ‘सभी के लिए 24×7 बिजली’ राज्यों के साथ एक संयुक्त पहल है जिसमें विशिष्ट राज्य/केन्द्र-शासित प्रदेश के रोडमैप एवं कार्य योजना को अंतिम रूप देने के लिए विद्युत क्षेत्र के सभी सेगमेंटों अर्थात विद्युत उत्पादन, पारेषण एवं वितरण, उर्जा दक्षता, डिस्कॉम की माली हालत इत्यादि को शामिल किया गया है, ताकि राज्यों/केन्द्र-शासित प्रदेशों के साथ विचार-विमर्श कर सभी को 24 घंटे बिजली सुलभ कराई जा सके। सभी के लिए बिजली से संबंधित दस्तावेजों में विद्युत क्षेत्र की समस्त वैल्यू चेन के लिए आवश्यक विभिन्न कदमों का विवरण शामिल है।

सभी घरों को कनेक्टिविटी मुहैया कराना 24×7 विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत आवश्यक है। ‘सौभाग्य’ बिजली मुहैया कराने के मसले का समाधान करने की दिशा में एक आवश्यक संरचनात्मक सहायता है।

बदल गई पावर सेक्टर की तस्वीर

केंद्र सरकार की नीतियों के चलते आज पारंपरिक और गैर-पारंपरिक ऊर्जा का भी भरपूर उत्पादन होने लगा है। सबसे बड़ी बात भारत इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर ही नहीं बना है, सौर ऊर्जा के क्षेत्र में एक बहुत बड़ा बाजार उभर कर सामने आया है। उर्जा क्षेत्र में इस कायापलट के पीछे उन योजनाओं के क्रियान्वयन में बेहतर तालमेल रहा है जिन्हें पिछले चार सालों में सरकार ने लागू किया है। उर्जा क्षेत्र की छोटी-छोटी समस्याओं को दूर करने के लिए लागू की गई इन योजनाओं से बहुत बड़े परिणाम सामने आए हैं। देश के हर घर को चौबीसों घंटे बिजली देने का लक्ष्य 2022 तक का है, और जिस गति से काम चल रहा है उससे अब यह प्राप्त कर लेना आसान लगने लगा है। पहले यह कल्पना भी नहीं की जा सकती थी कि देश में ऐसा भी हो सकता है।

पहली बार बिजली निर्यातक बना देश

चार साल पहले देश अभूतपूर्व बिजली संकट झेल रहा था, लेकिन ऐसा पहली बार हुआ है कि अब देश में खपत से अधिक बिजली उत्पाद होने लगा है। केंद्रीय विधुत प्राधिकरण के अनुसार भारत ने पहली बार वर्ष 2016-17 (फरवरी 2017 तक) के दौरान नेपाल, बांग्लादेश और म्यांमार को 579.8 करोड़ यूनिट बिजली निर्यात की, जो भूटान से आयात की जाने वाली करीब 558.5 करोड़ यूनिटों की तुलना में 21.3 करोड़ यूनिट अधिक है। 2016 में 400 के॰वी॰ लाइन क्षमता (132 के॰वी॰ क्षमता के साथ संचालित) मुजफ्फरपुर-धालखेबर (नेपाल) के चालू हो जाने के बाद नेपाल को बिजली निर्यात में करीब 145 मेगावाट की बढ़ोत्तरी हुई है।

नई कोयला नीति

नरेंद्र मोदी सरकार की कोयला नीति काम करने लगी है। इसके चलते देश अब उर्जा संकट से लगभग उबर चुका है । पिछली यूपीए सरकार की गलत कोयला नीति की वजह से अधर में फंसे दर्जनों ताप बिजली घरों में फिर से काम शुरू होने की उम्मीद बढ़ गई है। हाल ही में ‘शक्ति’ नाम से एक नई कोल लिंकेज पॉलिसी को मंजूरी दी गई है जो नए ताप बिजली घरों को आसानी से कोयला ब्लॉक उपलब्ध कराएगा। साथ ही पुराने एवं अटके पड़े बिजली घरों को भी कोयला उपलब्ध हो सकेगा। इससे कम से कम 30 हजार मेगावाट क्षमता का अतिरिक्त उत्पादन शुरू हो सकेगा। यानि अगर उत्पादन में बढ़ोत्तरी होगी तो बिजली की दरों भी कटौती की संभावना रहेगी। यूपीए सरकार वर्ष 2007 में कोल लिंकेज नीति लाई थी जिसके तहत 1,08,000 मेगावाट क्षमता की बिजली परियोजनाओं को कोयला देने का समझौता किया गया था, लेकिन उस दौरान कोयला उत्पादन नहीं बढ़ पाने की वजह से इनमें से अधिकांश परियोजनाएं अटकी हुई थीं। इसके बाद कई परियोनजाओं को कोयला आयात करने की अनुमति भी दी गई, लेकिन घोटाले और मुकदमों के कारण वो लागू न हो सकीं। अब जब देश में कोयला उत्पादन की स्थिति सुधरी है तो इन परियोजनाओं को भी नए सिरे से कोयला आवंटित करने की तैयारी की गई है।

परमाणु बिजली उत्पादन में भी आत्मनिर्भरता

मोदी सरकार ने 10 नए Pressurized Heavy-Water Reactors (PHWR) के निर्माण का फैसला किया है। सबसे बड़ी बात ये है कि ये काम अपने वैज्ञानिक करेंगे और कोई भी विदेशी मदद नहीं ली जाएगी। इन दस नए स्वदेशी न्यूक्लियर पावर प्लांट से 7,000 मेगावाट बिजली पैदा की जा सकेगी। इस निर्णय का सबसे बड़ा प्रभाव यह होगा कि भारत भी विश्व के अन्य देशों को Pressurized Heavy-Water Reactors की तकनीक देने वाला देश बन जायेगा, जो मेक-इन-इंडिया योजना को बहुत अधिक सशक्त करेगा। इसके अतिरिक्त 2021-22 तक 6,700 मेगावाट परमाणु ऊर्जा पैदा करने के लिए अन्य न्यूक्लियर पावर प्लांट के निर्माण का भी काम चल रहा है। इस समय देश में कुल 22 न्यूक्लियर पावर प्लांट बिजली पैदा कर रहे हैं जिनसे कुल 6,780 मेगावाट बिजली पैदा हो रही है।

UDAY से देश का भाग्योदय

देश की बिजली वितरण कंपनियों की खराब वित्तीय स्थिति में सुधार करके उनको पटरी पर लाने के लिए Ujwal DISCOM Assurance Yojana (UDAY) लागू की गई। सभी घरों को 24 घंटे किफायती एवं सुविधाजनक बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित करना ही इस योजना का मूल उद्देश्य है। यह योजना 20 नवंबर, 2015 से शुरू की गई इससे विरासत में मिली 4.3 लाख करोड़ रुपये के कर्ज की समस्या का मोदी सरकार ने स्थायी समाधान निकाल लिया। आज देश के सभी राज्य इस योजना से जुड़ चुके हैं।

उत्तर प्रदेश अंतिम राज्य था जो 14 अप्रैल 2017 को इस योजना में शामिल हुआ है। इसी साल जनवरी से UDAY वेब पोर्टल और मोबाइल एप्लिकेशन की शुरुआत भी की गई है। इसे विभिन्न राज्यों के DISCOM में हो रहे कार्यों और वित्तीय स्थिति पर निगरानी रखने के लिए तैयार किया गया है। इसका काम डाटा को राज्य स्तर और राष्ट्रीय स्तर में एकीकृत करके रखना है। इससे केन्द्रीय मंत्रालय स्तर पर DISCOM के काम पर निगरानी रखना आसान हो गया है। जिससे स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिला है, और गुणवत्ता में भी सुधार हुआ है।

सड़कें हो रही हैं ‘उजाला’

प्रधानमंत्री मोदी ने 5 जनवरी 2015 को 100 शहरों में पारंपरिक स्ट्रीट और घरेलू लाइट के स्थान पर LED लाइट लगाने के कार्यक्रम की शुरूआत की थी। इस राष्ट्रीय स्ट्रीट लाइटिंग कार्यक्रम (NSLP) का उद्देश्य 1.34 करोड़ स्ट्रीट लाइट के स्थान पर LED लाइट लगाना है। अब तक देशभर में पुरानी लाइट्स बदलकर 21 लाख नई LED लाइट लगाई जा चुकी हैं। इससे 29.5 करोड़ इकाई KWH बिजली की बचत हुई है। यही नहीं इसके चलते 2.3 लाख टन कार्बन डाई ऑक्साइड के उत्सर्जन में भी कमी आई है। यह परियोजना 23 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चलाई जा रही है। सबसे बड़ी बात यह है कि इसके चलते खर्च और बिजली की तो बचत हो ही रही है प्रकाश भी पहले से काफी बढ़ गया है। यही नहीं भारी मात्रा में LED बल्बों की खरीद होने के चलते उसकी कीमत भी 135 रुपये के बजाय 80 रुपये प्रति बल्ब बैठ रही है।

रीयल टाइम मिलेगी पावरकट की सूचना

केंद्र सरकार ने 24×7 किफायती और बिना बाधा के देश को बिजली देने के लिए ‘ऊर्जा मित्र एप’ लांच किया है। ऐसी सुविधा बिजली उपभोक्ताओं को पहली बार मुहैया कराई जा रही है। लोग www.urjamitra.com तथा ‘ऊर्जा मित्र एप’ पर देश के शहरी/ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली कटने की सूचना पा सकते हैं। ये जानकारी उपभोक्ताओं तक रीयल टाइम में पहुंच जाती है और वो इससे जुड़ी शिकायत भी दर्ज करा सकते हैं।

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