असम में बन रहा देश का सबसे लंबा रेलरोड पुल

असम में ब्रह्मपुत्र नदी पर बन रहा बोगिबिल पुल बनकर लगभग तैयार हो चुका है। यह करीब 5 कि॰मी॰ लंबा रेलरोड पुल भारत को नई ताकत देने वाला है। खासकर अरुणाचल सीमा से सटे होने के कारण सामरिक दृष्टि से यह बेहत महत्वपूर्ण है। भारत-चीन सीमा 3488 कि॰मी॰ की है जिसका 890 कि॰मी॰ अरुणाचल प्रदेश में ही है।

भारतीय रेल के इस पुल की आधारशिला वर्ष 2002 मे तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने रखी थी और साल 2007 में इसे नेशनल प्रोजेक्ट घोषित किया गया, लेकिन 2007 के बाद इस पुल में यू॰पी॰ए॰ सरकार ने कोई खास दिलचस्पी नहीं दिखाई और काम ठंडा पड़ गया। पिछले 4-5 वर्षों से इस पुल के निर्माण में खासा तेजी आई है।

पुल बनाने में किया गया आधुनिक तकनीक का प्रयोग

पुल के बन जाने से असम के डिब्रूगढ़ जिले ब्रह्मपुत्र के उत्तर की तरफ जाना आसान हो जाएगा, जिसमें अरुणाचल प्रदेश बेहद महत्वपूर्ण है। अरुणाचल प्रदेश और पूरे उत्तर पूर्वी भारत के चुनौतीपूर्ण भूगोल को देखते हुए बोगिबिल इस क्षेत्र में रेल लाइन के विकास की नई शुरूआत है। बोगिबिल में ब्रह्मपुत्र नदी की चौड़ाई 10.3 कि॰मी॰ है। पुल बनाने के लिे यहाँ तकनीक की सहायता से पहले पुल की चौड़ाई को कम किया गया फिर इस पर लगभग 5 किमी लंबा रेलरोड पुल बनाया गया है। यह भारत का सबसे लंबा रेलरोड पुल है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि फिलहाल यहाँ से 450 कि॰मी॰ दूर गुवाहाटी में ही ब्रह्मपुत्र को पार करने के लिए नदी पर पुल मौजूद है। जबकि सड़क पुल भी यहाँ से करीब 250 कि॰मी॰ दूर है। ऐसे भी आम लोगों की सुविधा के अलावा फौजी जरूरतों के लिहाज से यह पुल सेना को बड़ी ताकत देगा।

प्रोजेक्ट के चीफ इंजीनियर महेन्द्र सिंह के अनुसार जुलाई तक निर्माण कार्य पूर्ण कर लिया जाएगा और तब तक सिगनलिंग का काम भी पूरा हो जाएगा।

ये पुल से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण बातें

  • पुल की लंबाई 4.94 कि॰मी॰ है
  • यह स्वीडन-डेनमार्क ब्रिज की तर्ज पर बनाया गया है
  • एशिया के दूसरा सबसे बड़े इस पुल पर ऊपर तीन लेन की सड़क है और नीचे दो रेलवे लाइन
  • पानी की सतह से 32 मी॰ ऊँचा
  • ब्रह्मपुत्र पर बना ये पुल 600 कि॰मी॰ की दूरी बचाएगा। जिससे सेना एवं अन्य नागरिकों को भी सुविधा होगी

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