संगठन परिचय

सीमावर्ती देशों की विस्तारवादी नीतियों ने राष्ट्रीय सीमाओं की सुरक्षा के प्रश्न को और जटिल बना दिया है। देश की समुचित उन्नति और विकास के लिए 15106.7 कि.मी. लम्बी जमीनी और 7516.6 कि.मी. लम्बी सागरीय सीमाओं की सुरक्षा को सुनिश्चित करना नितांत आवश्यक है। इसका दायित्व राष्ट्रीय सुरक्षा तंत्र के साथ-साथ सामान्य नागरिक का भी है। समाज को सीमा सुरक्षा के प्रति संवेदनशील, जागृत, संगठित और देश-भक्ति से अनुप्राणित बनाए बिना सीमा सुरक्षा का कार्य अधूरा है। इस ध्येय को साकार करने की दिशा में “सीमा जागरण मंच” वर्ष 1985 से कार्यरत है। भारत के सभी सीमान्त जमीनी और समुद्र-तटवर्ती राज्यों में मंच के कार्य का विस्तार है। हमारा मानना है कि सुरक्षित सीमा ही समर्थ भारत का आधार है।

सीमा जागरण मंच के कार्यक्रम और गतिविधियाँ

  1. उत्सव आयोजन – सीमा सुरक्षा बलों के साथ रक्षाबंधन व दीपावली कार्यक्रमों का आयोजन।
  2. भारत माता पूजन कार्यक्रम – विशेषतः युवा वर्ग के साथ।
  3. विजयदशमी उत्सव – सीमान्त नागरिकों के मध्य शक्ति पूजन के कार्यक्रम।
  4. स्थापना दिवस (रामनवमी) – समाज-प्रबोधन के कार्यक्रम।
  5. समुद्र तटीय क्षेत्रों में मत्स्य पूजन, समुद्र पूजन, व्यास पूजन, नौका स्पर्धा कार्यक्रम।
  6. सीमान्त क्षेत्रों में अभावग्रस्त परिवारों के मेधावी विद्यार्थियों हेतु न्यूनतम शुल्क पर छात्रावास की सुविधा प्रदान करना।
  7. अन्य गतिविधियाँ – सीमा सुरक्षा संकल्प तिरंगा यात्रा, विभिन्न खेल प्रतिस्पर्धाएँ एवं विभिन्न स्थानों पर सेना भर्ती तैयारी कैम्प का आयोजन।
  8. सीमाओं के प्रति एकात्म-भाव निर्माण करने के लिए सीमा दर्शन जैसे कार्यक्रमों का आयोजन करना।
  9. सजीव परम्पराओं के संवहन, विरासत स्थलों के पुनर्जीवन और रोजगार प्रदान करने के उद्देश्य से विभिन्न प्रकार के सांस्कृतिक मेलों का आयोजन।

सीमा सुरक्षा के लिए आह्वान

भारत के सम्मान और संप्रभुता को विश्व-पटल पर अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए सीमाओं की सुरक्षा अति आवश्यक है। भीष्म पितामह के शब्दों में देश की सीमा माता के वस्त्र के समान होती है एवं उसकी रक्षा करना पुत्र का प्रथम कर्तव्य है। हमारे पूर्वजों और मनीषियों ने इस महत्व को समझा था और इसके पालन के लिए सर्वस्व अर्पित करने के उदाहरण रूप में स्वयं को प्रस्तुत किया था। इसलिए भारत अतीत-काल से अनेक प्रकार की चुनौतियों का सामना करते हुए भी सुरक्षित रहा। लेकिन वर्तमान समय में एक बार फिर से भारत की सामरिक स्थिति पर आघात हो रहा है इसलिए आओ हम सभी राष्ट्र युग धर्म के प्रति अपने कर्त्तव्य पालन के लिए कृत-संकल्प हों…

हे मातृ-भूमि तेरे लिये मरना ही जीना है
और तुझे भूलकर जीना भी मरना है”
~स्वातंत्रय वीर सावरकर

 

मेरा बलिदान सार्थक होने से पहले अगर
मौत दस्तक देगी तो संकल्प लेता हूँ की मैं
मौत को भी मार डालूँगा
~शहीद कैप्टन मनोज कुमार पाण्डे
परमवीर चक्र, 1/11 गोरखा राईफल्स